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Social inclusive policy and Mgnrega : A Sociological Study (SAMAJIK SAMAVESHI NITI AUR MGNREGA: EK SAMAJVIGYANIK ADHYAYAN)

-अनामिका सिंह सामाजिक समावेशी नीति और मनरेगा : एक समाजवैज्ञानिक अध्ययन ’’महात्माँ गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम’’ कांग्रेस सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तौर पर देश के समस्त ग्रामीण जनपदों में समानान्तर चलायी जा रही है, जिसे ग्रामीण बेरोजगारी निवारण, महिला सशक्तिकरण, नगरीय प्रवजन को रोकना, पर्यावरणीय सुरक्षा व प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि के साथ ही ग्रामीण इलाकों के नागरिकों के जीवन-यापन व जीवन स्तर में आर्थिक सुधारों के प्रतिफल के रूप में चलाया जा रहा है, केन्द्रीय आँकड़ों व मनरेगा समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार इस योजना ने अपार सफलता प्राप्त की है जिसे ‘सील्वर वॉलेट’ भी कहा जाता हैं। मनरेगा योजना का निर्माण जिन उद्देश्यों को लेकर किया गया, उन सबको मिलाने पर आर्थिक सबलता व सामाजिक समावेशी की धारणा ही परिलक्षित होती है। जिसके लिए समाज के निम्न दर्जे के लोग व अनुसूचित जाति, जनजाति साथ ही आधी आबादी के रूप में महिलाओं को इस योजना में शामिल किया गया ताकि, इन वर्गों की आर्थिक सबलता के फलस्वरूप सामाजिक स्थिति में सुधार हो तथा यह निम्न वर्ग समाज की मुख्यधारासे जुड़ सकें। इन्...

Reality of the Right to Information Act 2005 (सूचना का अधिकार अधिनियम की वास्तविक दशा का मूल्यांकन (R T I Act))

सूचना का अधिकार अधिनियम की वास्तविक दशा का मूल्यांकन  सारांश- सूचना का अधिकार अधिनियम - 2005, इसका इस्तेमाल करने से आपको बिजली या पानी के मीटर का नया कनेक्शन नहीं मिल सकता, लेकिन सूचना का अधिकार अधिनियम आपको इस बात का पता लगाने में मददगार हो सकता है कि आपके आवेदन पर कार्यवाई करने की जिम्मेदारी किसकी है, कार्यवाई में क्या प्रगति हुई है, सम्बन्धित विभाग के सेवा मानदण्डों के अनुसार आपको कब तक कनेक्शन मिल जाना चाहिए था या फिर आपके मामले में कार्यवाई में देरी क्यों हुई है? जी हॉ सूचना का अधिकार अधिनियम के लागू हो जाने के बाद भारत के सभी नागरिकों को सूचनाएं मांगने और कार्यदायी संस्था द्वारा जबाब पाने का अधिकार है। यह अधिनियम इस बात को मान्यता प्रदान करता है कि ‘‘भारत जैसे लोकतंत्र में सरकार के पास मौजूद सभी सूचनाएं अंततः जनता के लिए एकत्रित की गई सूचनाएं हैं।’’ नागरिकों को सूचनाएं उपलब्ध कराना सरकार के कामकाज का एक सामान्य अंश भर है क्योंकि जनता का अधिकार है कि सार्वजनिक अधिकारी उनके पैसे से या फिर उनके नाम पर क्या करते हैं या कर रहे हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम के लागू करने के पीछ...